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जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया) 2026
Jivitputrika Vrat (Jitiya) 2026
नई दिल्ली · IST
जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया) 2026 में 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को है।
- कृष्ण पक्ष अष्टमी: सुबह 8:00 से सुबह 5:52 (4 अक्टूबर) तक
क्या है और कैसे मनाएं
जीवित्पुत्रिका (जितिया, जिउतिया) व्रत बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल में माताएं संतान की लंबी आयु और कुशलता के लिए आश्विन कृष्ण अष्टमी (पूर्णिमांत) को रखती हैं। एक दिन पहले नहाय-खाय होता है; व्रत निर्जला होता है, दिन-रात जल भी ग्रहण नहीं किया जाता, जीमूतवाहन की पूजा व जितिया कथा होती है। पारण अगली सुबह किया जाता है।
तिथि का नियम
भाद्रपद (अमांत) कृष्ण अष्टमी: मध्याह्न व्यापिनी तिथि.
तिथि द्रिक पंचांग के अनुसार है (मध्याह्न में अष्टमी; सूर्योदय पर थोड़ी देर ही हो, जैसे 2023 में, तो पिछला दिन)। नहाय-खाय एक दिन पहले और पारण अगली सुबह होता है; क्षेत्रीय पंचांगों (जैसे मिथिला) में कभी-कभी एक दिन का अंतर होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया) 2026 कब है?
जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया) 2026 शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को है।
जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया) 2026 3 अक्टूबर को ही क्यों है?
तिथि का नियम: भाद्रपद (अमांत) कृष्ण अष्टमी: मध्याह्न व्यापिनी तिथि। 2026 में यह 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को पड़ता है (नई दिल्ली)।
समय शहर के अनुसार बदलते हैं। यहां दिए सभी समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रोदय पर आधारित हैं; दूसरे शहर में कुछ मिनट और कभी-कभी तिथि भी बदल सकती है। तिथियां द्रिक पंचांग की स्मार्त (सामान्य) गणना से मेल खाती हैं। अपने शहर के लिए पंचांग देखें।
2026 के प्रमुख त्योहार
- सकट चौथ
- लोहड़ी
- मकर संक्रांति
- मौनी अमावस्या
- वसंत पंचमी
- महाशिवरात्रि
- होलिका दहन
- शीतला अष्टमी (बसौड़ा)
- चैत्र नवरात्रि प्रारंभ
- गुड़ी पड़वा / उगादी
- गणगौर
- राम नवमी
- हनुमान जयंती
- अक्षय तृतीया
- वट सावित्री व्रत
- गंगा दशहरा
- वट पूर्णिमा व्रत
- गुरु पूर्णिमा
- हरियाली तीज
- नाग पंचमी
- रक्षा बंधन
- कजरी तीज
- हल षष्ठी (ललही छठ)
- कृष्ण जन्माष्टमी
- गणेश चतुर्थी
- हरतालिका तीज
- ऋषि पंचमी
- अनंत चतुर्दशी
- पितृ पक्ष आरंभ (प्रतिपदा श्राद्ध)
- सर्व पितृ अमावस्या (महालया)
- शारदीय नवरात्रि प्रारंभ
- दशहरा (विजयादशमी)
- शरद पूर्णिमा
- करवा चौथ
- अहोई अष्टमी
- धनतेरस
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा)
- नरक चतुर्दशी (रूप चौदस)
- गोवर्धन पूजा
- भाई दूज
- छठ पूजा
- देवउठनी एकादशी
- तुलसी विवाह
- देव दीपावली
- कार्तिक पूर्णिमा